जब IVF बार-बार असफल हो जाए, embryo स्थानांतरण के बाद भी गर्भ न ठहरे, या अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय की अंदरूनी परत बहुत पतली दिखाई दे, तो जोड़ों के मन में बस एक ही सवाल बार-बार उठता है, “अब आगे क्या रास्ता बचा है?”

ऐसे कठिन मामलों में आज प्रजनन चिकित्सा की एक नई और उम्मीद भरी तकनीक सामने आई है, जिसका नाम है PRP थेरेपी। यह रीजनरेटिव मेडिसिन की वो तकनीक है जो महिला के अपने ही रक्त से तैयार होती है, और गर्भाशय की परत को मज़बूत बनाने या अंडाशय को फिर से सक्रिय करने में मदद कर सकती है।

IVF में PRP थेरेपी के फायदे आज दुनिया भर के फर्टिलिटी विशेषज्ञों के बीच सबसे चर्चित विषयों में से एक हैं। उन महिलाओं के लिए जिनके गर्भाशय की परत बार-बार पतली रहती है, जिनका ओवेरियन रिज़र्व कमज़ोर हो चुका है, या जिनके कई IVF चक्र असफल हो चुके हैं, यह तकनीक एक नई राह खोल रही है।

जयपुर के Ritu IVF में, डॉ. ऋतु अग्रवाल अपने 13 वर्षों से अधिक के फर्टिलिटी अनुभव के साथ ऐसे जोड़ों को PRP थेरेपी की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाती हैं, और हर मरीज़ की स्थिति के अनुसार सही उपचार योजना तैयार करती हैं।

इस ब्लॉग में आप विस्तार से जानेंगी कि PRP थेरेपी क्या है, IVF में इसके क्या फायदे हो सकते हैं, इसकी पूरी प्रक्रिया कैसी होती है, यह किन महिलाओं के लिए उपयुक्त मानी जाती है, और 2026 की नई शोध इस तकनीक के बारे में क्या कहती है।

PRP थेरेपी क्या होती है: बुनियाद से समझिए

PRP का पूरा नाम है Platelet-Rich Plasma, यानी “प्लेटलेट से भरपूर प्लाज़्मा”।

हमारे रक्त में तीन मुख्य घटक होते हैं, लाल रक्त कोशिकाएँ, सफेद रक्त कोशिकाएँ और प्लेटलेट्स। प्लेटलेट्स वो छोटी-छोटी कोशिकाएँ होती हैं जो शरीर पर चोट लगने पर खून का बहाव रोकती हैं और ऊतकों की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू करती हैं। इन्हीं प्लेटलेट्स के भीतर सैकड़ों ग्रोथ फैक्टर यानी विकास तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया को तेज़ी से सक्रिय करते हैं।

PRP थेरेपी में इन्हीं प्लेटलेट्स को महिला के अपने रक्त से निकाला जाता है। फिर एक विशेष सेंट्रीफ्यूज मशीन की मदद से रक्त को घुमाकर प्लेटलेट्स को सघन किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद जो तरल तैयार होता है, उसमें सामान्य रक्त की तुलना में 5 से 10 गुना अधिक प्लेटलेट्स और ग्रोथ फैक्टर होते हैं। इसी सघन तरल को PRP कहा जाता है।

PRP का उपयोग पहले लंबे समय से हड्डियों के रोगों, खेल चिकित्सा और त्वचा के उपचार में किया जाता रहा है। जब वैज्ञानिकों ने देखा कि यह ऊतकों के पुनर्निर्माण में बेहद असरदार है, तब इसका उपयोग प्रजनन चिकित्सा में भी शुरू किया गया।

महिला बांझपन की दुनिया में PRP का उपयोग कई स्थितियों में किया जाता है, जैसे लगातार पतली बनी रहने वाली गर्भाशय की परत (refractory thin endometrium), गर्भाशय के अंदर के चिपकाव (Asherman syndrome), लंबे समय से चल रही गर्भाशय की सूजन (chronic endometritis), और बार-बार होने वाली इम्प्लांटेशन विफलता। इसके साथ ही, जिन महिलाओं का अंडाशय बहुत कमज़ोर प्रतिक्रिया देता है या जिनमें समय से पहले अंडाशय निष्क्रिय (premature ovarian failure) होने लगता है, उनके लिए ओवेरियन PRP एक नई संभावना के रूप में सामने आ रही है।

IVF में PRP थेरेपी के फायदे: हर स्थिति में विस्तार से

पहला फायदा: पतली गर्भाशय परत को मोटा करना

IVF में सफल गर्भधारण के लिए गर्भाशय की अंदरूनी परत (endometrium) की मोटाई कम से कम 7 से 8 mm होना ज़रूरी माना जाता है। जब यह परत इससे पतली रहती है, तो embryo अपनी जगह ठीक से बना नहीं पाता और IVF चक्र असफल हो जाता है। इसी स्थिति को thin endometrium यानी पतली गर्भाशय परत कहा जाता है।

इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे बार-बार किए गए D&C, गर्भाशय में पुराना संक्रमण, एस्ट्रोजन हार्मोन का असर कम पड़ना, गर्भाशय में रक्त की आपूर्ति कम होना, या गर्भाशय की टीबी।

ऐसे जटिल मामलों में IVF में PRP थेरेपी के फायदे सबसे स्पष्ट रूप से सामने आते हैं, और हाल के कई बड़े अध्ययन इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।

नई दिल्ली के आकांक्षा IVF सेंटर में अगस्त 2023 से जुलाई 2024 के बीच 100 मरीज़ों पर किए गए एक प्रोस्पेक्टिव अध्ययन में पाया गया कि PRP समूह में नैदानिक गर्भधारण दर 35.71 प्रतिशत रही, जबकि बिना PRP वाले समूह में यह केवल 10 प्रतिशत थी, और कोई दुष्प्रभाव दर्ज नहीं किया गया। यह अंतर सांख्यिकीय रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना गया। ScienceDirect

2024 तक के अध्ययनों पर आधारित एक मेटा-विश्लेषण ने यह स्पष्ट किया कि PRP प्राप्त करने वाली महिलाओं में गर्भाशय परत की मोटाई औसतन 1.23 mm बढ़ी, नैदानिक गर्भधारण दर दोगुने से अधिक हुई, और जीवित जन्म दर भी लगभग ढाई गुना बेहतर रही। PubMed Central

2025 में प्रकाशित एक नेटवर्क मेटा-विश्लेषण ने पतली गर्भाशय परत के लिए छह अलग-अलग उपचारों की तुलना की, और पाया कि नैदानिक गर्भधारण दर बढ़ाने में PRP सबसे प्रभावी विकल्प साबित हुआ, जिसकी रैंकिंग 80.12 प्रतिशत रही। यह आज तक का सबसे मज़बूत प्रमाण है कि PRP पतली गर्भाशय परत वाली महिलाओं में IVF के परिणाम सुधारने में वास्तव में कारगर है। nih


दूसरा फायदा: कमज़ोर अंडाशय रिज़र्व में सुधार की संभावना

Poor Ovarian Reserve का अर्थ है अंडाशय में अंडों की संख्या और गुणवत्ता, दोनों का कम हो जाना। इसमें AMH का स्तर गिर जाता है, FSH बढ़ जाता है, और एंट्रल फॉलिकल काउंट (AFC) कम रहता है। यह स्थिति आमतौर पर उम्र के साथ आती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह कम उम्र में भी विकसित हो सकती है।

इंट्रा-ओवेरियन PRP थेरेपी में PRP को अल्ट्रासाउंड के मार्गदर्शन में सीधे अंडाशय में इंजेक्ट किया जाता है। इसमें मौजूद विकास तत्व (growth factors) जैसे VEGF, PDGF, EGF और Sphingosine-1-Phosphate अंडाशय के ऊतकों के पुनर्निर्माण और फॉलिकल बनने की प्रक्रिया को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।

जून 2024 तक प्रकाशित 23 अध्ययनों और 1,853 महिलाओं पर किए गए एक मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि कमज़ोर अंडाशय प्रतिक्रिया वाली महिलाओं में इंट्रा-ओवेरियन PRP इंजेक्शन के बाद अंडों की संख्या, परिपक्व M2 अंडों की संख्या, AFC और AMH स्तर में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार हुआ, और गर्भधारण अनुपात 0.21 तथा जीवित जन्म अनुपात 0.18 दर्ज किया गया। Springer

नवंबर 2025 तक प्रकाशित सात रैंडमाइज़्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स और 422 महिलाओं पर आधारित एक नए मेटा-विश्लेषण ने भी इन निष्कर्षों की पुष्टि की, और दिखाया कि PRP उपचार के बाद AFC और AMH दोनों में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार पाया गया। Frontiers

लेकिन यहाँ एक ईमानदार बात समझनी ज़रूरी है। 2025 की एक और व्यापक समीक्षा यह स्पष्ट करती है कि इंट्रा-ओवेरियन PRP अभी भी एक प्रायोगिक उपचार माना जाता है, और मौजूदा उच्च-स्तरीय प्रमाण जीवित जन्म दर में सुधार को लगातार सिद्ध नहीं कर पाते। यानी PRP कुछ महिलाओं के लिए नई उम्मीद ज़रूर है, लेकिन यह हर मामले में सफलता की गारंटी नहीं देता। आपकी डॉक्टर ही आपकी स्थिति देखकर यह तय कर सकती हैं कि यह आपके लिए उपयुक्त है या नहीं। PubMed Central


तीसरा फायदा: बार-बार होने वाली इम्प्लांटेशन विफलता में नई उम्मीद

Recurrent Implantation Failure (RIF) यानी वह स्थिति जब अच्छी गुणवत्ता वाले embryo के स्थानांतरण के बावजूद दो या अधिक बार गर्भधारण नहीं हो पाता। यह IVF का सबसे निराशाजनक पहलू माना जाता है, और इसके पीछे अक्सर गर्भाशय की रिसेप्टिविटी यानी embryo को स्वीकार करने की क्षमता कमज़ोर होती है।

यहाँ भी PRP एक मज़बूत भूमिका निभा सकती है।

2,449 मरीज़ों पर आधारित 23 अध्ययनों के एक व्यवस्थित मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि PRP ने नैदानिक गर्भधारण दर लगभग 1.84 गुना, जीवित जन्म दर 1.75 गुना बेहतर की, और गर्भपात की दर लगभग आधी हो गई। PubMed Central

दिसंबर 2025 में Fertility and Sterility जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में, जिसमें पतली गर्भाशय परत या RIF वाली महिलाओं को शामिल किया गया था, PRP समूह में जीवित जन्म दर 28.6 प्रतिशत रही, जबकि बिना PRP वाले समूह में यह केवल 17.5 प्रतिशत थी, और यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। Fertility and Sterility


चौथा फायदा: समय से पहले अंडाशय निष्क्रियता में IVF की संभावना खोलना

Premature Ovarian Insufficiency (POI) का मतलब है 40 वर्ष से पहले अंडाशय का कार्य लगभग बंद हो जाना। यह एक दुर्लभ लेकिन बेहद कठिन स्थिति है, जिसमें न तो प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना ज़्यादा होती है, न ही पारंपरिक IVF की।

POI वाली महिलाओं में इंट्रा-ओवेरियन PRP इंजेक्शन के असर पर हुए शोध में AFC, FSH, AMH और LH स्तरों में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण सुधार पाया गया। POI मामलों में गर्भधारण अनुपात लगभग 0.138 और जीवित जन्म अनुपात 0.10 दर्ज किया गया। Springer

यह आंकड़े पारंपरिक उपचारों की तुलना में सीमित ज़रूर हैं, लेकिन एक ऐसी स्थिति में जहाँ अब तक के विकल्प न के बराबर थे, यह एक नई शुरुआत है। हालाँकि, यह दोहराना ज़रूरी है कि POI में PRP अभी एक प्रायोगिक उपचार है, और इसे आज़माने का निर्णय आपकी डॉक्टर की पूरी जाँच के बाद ही लिया जाना चाहिए।


पाँचवाँ फायदा: एशरमन सिंड्रोम और गर्भाशय की पुरानी सूजन में मदद

Asherman Syndrome में गर्भाशय के अंदर चिपकाव (adhesions) यानी निशान वाला ऊतक बन जाता है, जो अक्सर बार-बार गर्भपात या D&C के बाद विकसित होता है। इसकी वजह से गर्भाशय की परत ठीक से विकसित नहीं हो पाती और embryo के ठहरने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

PRP को इस स्थिति में भी उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है। शोध बताते हैं कि PRP रक्त वाहिकाओं के निर्माण (angiogenesis) को बढ़ावा देकर निशान बनने की प्रक्रिया को कम करता है, और गर्भाशय के अंदर के वातावरण को फिर से स्वस्थ करने में मदद करता है।

गर्भाशय की पुरानी सूजन (chronic endometritis) में भी PRP का असर सामने आया है। 2025 में 219 मरीज़ों पर हुए एक पूर्वव्यापी अध्ययन में पाया गया कि PRP समूह में नैदानिक गर्भधारण दर 58.25 प्रतिशत और जीवित जन्म दर 52.43 प्रतिशत रही, जबकि बिना PRP वाले समूह में ये क्रमशः 40.52 प्रतिशत और 34.48 प्रतिशत थीं। यह अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण था। nih


छठा फायदा: अपने ही शरीर से तैयार, इसलिए दुष्प्रभाव लगभग नहीं

IVF में PRP थेरेपी के फायदे की सूची में यह सबसे बड़ा सुरक्षा संबंधी लाभ है। PRP महिला के अपने ही रक्त से तैयार होती है, इसलिए इसे ऑटोलॉगस उपचार (autologous treatment) कहा जाता है।

इसमें किसी बाहरी रसायन, दवा या डोनर रक्त का उपयोग नहीं होता। यानी एलर्जी, इम्यून रिजेक्शन, या संक्रमण फैलने का जोखिम लगभग न के बराबर होता है।

हाल के कई नैदानिक अध्ययनों ने इस सुरक्षा को बार-बार पुष्ट किया है। आकांक्षा IVF सेंटर के अध्ययन में किसी भी मरीज़ पर कोई दुष्प्रभाव नहीं देखा गया। अमेरिका में एशरमन सिंड्रोम और पतली गर्भाशय परत वाली महिलाओं पर हुए एक नैदानिक परीक्षण में भी PRP प्राप्त करने वाली 22 मरीज़ों में से किसी पर कोई गंभीर या मामूली दुष्प्रभाव दर्ज नहीं हुआ। ScienceDirectclinicaltrials

यही सुरक्षा प्रोफ़ाइल PRP को उन महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाती है, जो पहले से कई असफल IVF चक्रों, हार्मोनल इंजेक्शनों और भावनात्मक तनाव से गुज़र चुकी होती हैं।


एक ईमानदार बात

PRP थेरेपी एक उभरती हुई और बहुत संभावनाओं से भरी तकनीक है, लेकिन यह कोई जादुई इलाज नहीं है। यह IVF प्रक्रिया का सहायक उपचार (adjunctive therapy) है, यानी मुख्य उपचार का स्थान नहीं लेती, बल्कि उसकी सफलता की संभावना बढ़ाने में मदद करती है। हर महिला PRP की उपयुक्त उम्मीदवार नहीं होती, और इसके परिणाम हर मामले में अलग हो सकते हैं। सही निर्णय आपकी फर्टिलिटी डॉक्टर ही आपकी पूरी मेडिकल कहानी देखकर ले सकती हैं।

PRP थेरेपी की पूरी प्रक्रिया: चरण दर चरण

PRP थेरेपी एक आसान बाह्य रोगी प्रक्रिया है, जिसमें मरीज़ को अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती। पूरी प्रक्रिया लगभग 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है।

चरण 1: उपचार से पहले की जाँच

PRP शुरू करने से पहले डॉ. ऋतु अग्रवाल मरीज़ की पूरी चिकित्सकीय जानकारी लेती हैं। अल्ट्रासाउंड से गर्भाशय की अंदरूनी परत की मोटाई देखी जाती है, और रक्त जाँचों में AMH, FSH तथा AFC के स्तर की जाँच की जाती है। इन्हीं नतीजों के आधार पर यह तय किया जाता है कि महिला को गर्भाशय में PRP की ज़रूरत है या अंडाशय में।

चरण 2: रक्त लेना

माहवारी चक्र के नौवें या दसवें दिन महिला के हाथ की नस से 10 से 20 ml रक्त निकाला जाता है। यह बिल्कुल एक सामान्य रक्त जाँच जैसी प्रक्रिया होती है और इसमें कोई दर्द नहीं होता।

चरण 3: सेंट्रीफ्यूगेशन

इस रक्त को प्रयोगशाला में एक विशेष सेंट्रीफ्यूज मशीन में रखा जाता है। तेज़ गति से घुमाने पर रक्त तीन परतों में अलग हो जाता है। सबसे ऊपर की परत में प्लेटलेट से भरपूर प्लाज़्मा होता है, जिसमें विकास तत्वों की मात्रा सबसे अधिक होती है।

चरण 4: PRP को अलग करना

PRP वाली परत को बहुत सावधानी से अलग किया जाता है। ज़रूरत पड़ने पर इसे सक्रिय करने के लिए कैल्शियम ग्लूकोनेट मिलाया जाता है। इस तैयार PRP में VEGF, PDGF, EGF और TGF-β जैसे विकास तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं।

चरण 5: इंजेक्शन देना

गर्भाशय में PRP: इसे एक बहुत पतले इंट्रायूटरीन कैथेटर की सहायता से सीधे गर्भाशय की गुहा में डाला जाता है। यह प्रक्रिया लगभग IUI जैसी ही होती है और इसमें बेहोशी की दवा देने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

अंडाशय में PRP: इसे योनि मार्ग से किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड के मार्गदर्शन में अंडाशय में इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया में हल्की बेहोशी की दवा दी जा सकती है।

चरण 6: उपचार के बाद की निगरानी

गर्भाशय में PRP देने के 2 से 4 हफ्ते बाद अल्ट्रासाउंड से गर्भाशय परत की मोटाई जाँची जाती है। अंडाशय में PRP देने के 2 से 3 महीने बाद AMH, FSH और AFC की दोबारा जाँच की जाती है। इन नतीजों के आधार पर अगले IVF चक्र का सही समय तय किया जाता है।

किन महिलाओं को IVF में PRP थेरेपी दी जाती है

डॉ. ऋतु अग्रवाल के अनुसार, निम्नलिखित स्थितियों में PRP थेरेपी पर विचार किया जा सकता है:

स्थितिPRP का प्रकार
पतली गर्भाशय परत (7 mm से कम)गर्भाशय में PRP
बार-बार होने वाली इम्प्लांटेशन विफलता (दो या अधिक बार)गर्भाशय में PRP
कमज़ोर अंडाशय रिज़र्व (DOR)अंडाशय में PRP
समय से पहले अंडाशय निष्क्रियता (POI)अंडाशय में PRP
एशरमन सिंड्रोमगर्भाशय में PRP
गर्भाशय की पुरानी सूजनगर्भाशय में PRP
PCOS के साथ कमज़ोर अंडाशय रिज़र्वअंडाशय में PRP

हर मरीज़ की चिकित्सकीय कहानी, हार्मोन स्तर और अल्ट्रासाउंड के नतीजे अलग-अलग होते हैं। इसलिए PRP देनी है या नहीं, और किस तरह की PRP देनी चाहिए, यह निर्णय एक योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञ ही ले सकते हैं।


गर्भाशय में PRP और अंडाशय में PRP में अंतर

पहलूगर्भाशय में PRPअंडाशय में PRP
कहाँ दी जाती हैगर्भाशय की गुहा मेंअंडाशय में
किसके लिए उपयुक्तपतली गर्भाशय परत, बार-बार होने वाली इम्प्लांटेशन विफलता, एशरमन सिंड्रोमकमज़ोर अंडाशय रिज़र्व, समय से पहले अंडाशय निष्क्रियता
प्रक्रियाइंट्रायूटरीन कैथेटर से दी जाती हैयोनि मार्ग के अल्ट्रासाउंड के मार्गदर्शन में इंजेक्शन
बेहोशी की दवाज़रूरत नहींहल्की बेहोशी दी जा सकती है
नतीजे कब दिखते हैं2 से 4 सप्ताह में2 से 3 महीने में
मुख्य उद्देश्यगर्भाशय परत की मोटाई और रिसेप्टिविटी बेहतर करनाAMH बढ़ाना और FSH घटाना

PRP Therapy और IVF की सफलता दर: क्या कहती है?

IVF में PRP थेरेपी के फायदे को लेकर पिछले दो वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण Studies सामने आई हैं।

January 2026 में प्रकाशित एक Narrative Review के अनुसार Thin Endometrium वाली महिलाओं में Intrauterine PRP के बाद अक्सर Endometrial Thickness 7 mm या उससे अधिक हो गई और Reproductive Outcomes में सुधार हुआ। Repeated Implantation Failure में कुछ Randomized Controlled Trials ने Control Group की तुलना में PRP-treated Patients में Higher Pregnancy और Implantation Rates दिखाई।

Diminished Ovarian Reserve वाली महिलाओं पर एक Early Pilot Study में Intraovarian PRP के बाद FSH 13.6 से घटकर 7.7 mIU/mL हो गया। हर Patient से 4 से 7 Mature Oocytes Retrieved हुए और हर Patient में कम से कम एक Blastocyst Cryopreservation के लिए तैयार हुआ। 

Comprehensive Reviews के अनुसार PRP का सकारात्मक प्रभाव Adenomyosis, Thin Endometrial Lining, Recurring Implantation Failure, Chronic Endometritis और Asherman Syndrome वाली महिलाओं में देखा गया है। 

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि PRP अभी भी Emerging Treatment है और इस पर Large-Scale Randomized Controlled Trials की ज़रूरत है। लेकिन उपलब्ध साक्ष्य काफी उत्साहजनक हैं, खासकर उन Cases में जहाँ अन्य treatments काम नहीं कर पाई।

PRP Therapy से पहले और बाद में क्या ध्यान रखें?

PRP से पहले:

  • Doctor से अपनी पूरी Medical History साझा करें
  • सभी ज़रूरी Blood Tests और Ultrasound करवाएं
  • कोई भी Blood Thinners जैसे Aspirin ले रहे हों तो Doctor को बताएं
  • अच्छी नींद लें और Hydrated रहें

PRP के बाद:

  • प्रक्रिया के दिन भारी काम से बचें
  • Doctor द्वारा दी गई Hormonal Medications नियमित रूप से लें
  • Follow-up Ultrasound और Blood Tests समय पर करवाएं
  • यदि कोई असामान्य Symptom हो तो तुरंत Clinic से संपर्क करें

PRP Therapy की लागत और उपलब्धता: क्या जानें?

PRP Therapy एक Add-On Procedure है जो Standard IVF Package में शामिल नहीं होती। इसकी लागत Clinic और प्रक्रिया के प्रकार पर निर्भर करती है।

Jaipur जैसे Tier-2 City में PRP Therapy की लागत Metro Cities की तुलना में अपेक्षाकृत कम होती है। हर Case की ज़रूरत अलग होती है इसलिए सटीक लागत Consultation के बाद ही बताई जा सकती है।

Ritu IVF में Financial Counseling Session में Patients को Treatment की पूरी Cost Breakdown पहले से बता दी जाती है ताकि कोई Hidden Charge का Surprise न हो।

Healthcare CTA

IVF के बारे में कोई सवाल?

हम यहाँ मदद के लिए हैं! 💙

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

IVF में PRP थेरेपी के फायदे सबसे ज़्यादा किसे मिलते हैं?

IVF में PRP थेरेपी के फायदे सबसे अधिक उन महिलाओं को मिलते हैं जिनका Endometrium पतला है, Poor Ovarian Reserve है, दो या अधिक बार IVF Fail हो चुका है या Asherman Syndrome और Chronic Endometritis है। सामान्य IVF Patients को यह ज़रूरी नहीं।

क्या PRP Therapy सभी IVF Clinics में उपलब्ध है?


नहीं। PRP Therapy एक Specialized Procedure है जो केवल Advanced Fertility Centers में उपलब्ध होती है जहाँ Trained Embryologists और Fertility Specialists हों। Ritu IVF, Jaipur में यह सुविधा Dr. Ritu Agarwal की देखरेख में उपलब्ध है।

PRP Therapy के बाद कितने समय में IVF Cycle शुरू होता है?


Endometrial PRP के बाद 2 से 4 सप्ताह में Thickness Check होती है और उसी या अगले Cycle में Embryo Transfer हो सकता है। Intraovarian PRP के बाद Ovarian Reserve Markers 2 से 3 महीने में Check किए जाते हैं और फिर IVF Cycle Plan होता है।

क्या PRP Therapy दर्दनाक होती है?


Intrauterine PRP बिल्कुल IUI जैसी होती है और इसमें Anesthesia की ज़रूरत नहीं। Intraovarian PRP में हल्की Sedation दी जा सकती है। दोनों Procedures में कोई गंभीर दर्द नहीं होता।

क्या PRP Therapy IVF की सफलता की गारंटी देती है?


PRP IVF की Success की Guarantee नहीं देती। यह उन Specific Cases में Endometrial Conditions या Ovarian Reserve को बेहतर बनाती है जहाँ ये Factors IVF की सफलता में बाधा बन रहे हों। Qualified Fertility Specialist के साथ Consultation के बाद ही यह निर्णय लेना उचित है।

क्या PRP के साथ-साथ अन्य Treatments भी चल सकती हैं?


हाँ। PRP को अक्सर Hormonal Medications जैसे Estrogen Supplementation, Progesterone Support या अन्य IVF Protocols के साथ मिलाकर दिया जाता है। Dr. Ritu Agarwal हर Case के लिए Personalized Protocol तैयार करती हैं।