गर्मी में प्रेग्नेंसी डाइट प्लान हर उस महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है जो गर्मी के मौसम में गर्भावस्था से गुजर रही है। भारत में ग्रीष्म ऋतु वैसे भी बहुत कठिन होती है। तापमान चालीस से पैंतालीस डिग्री तक पहुँच जाता है, तेज धूप और उमस से शरीर थका-थका सा महसूस करता है। ऐसे में यदि आप गर्भवती हैं तो यह चुनौती दोगुनी हो जाती है।

गर्भावस्था में शरीर पहले से ही अनेक परिवर्तनों से गुजर रहा होता है। हार्मोन बदल रहे होते हैं, पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है और शरीर को सामान्य से अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। ऊपर से गर्मी का प्रकोप शरीर को और अधिक कमजोर बना देता है। यदि सही गर्मियों में गर्भावस्था डाइट प्लान न अपनाया जाए तो माँ और शिशु दोनों की सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि प्रेग्नेंसी में गर्मी में क्या खाएं, क्या नहीं खाना चाहिए, पूरे दिन का आहार कैसा हो, प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से कैसे बचें और तिमाही के अनुसार खान-पान कैसे बदलें। यह सम्पूर्ण जानकारी डॉ. ऋतु अग्रवाल, रितु आईवीएफ जयपुर की विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है।

गर्मी का गर्भावस्था पर प्रभाव

यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि ग्रीष्म ऋतु गर्भावस्था को किस प्रकार प्रभावित करती है। जब बाहर का तापमान बढ़ता है तो हमारा शरीर स्वयं को ठंडा रखने के लिए अधिक पसीना बहाता है। इस प्रक्रिया में शरीर से जल और आवश्यक खनिज तेजी से बाहर निकल जाते हैं।

निर्जलीकरण का खतरा: गर्भावस्था में रक्त की मात्रा सामान्य से चालीस से पचास प्रतिशत अधिक हो जाती है। इसका अर्थ है कि शरीर को जल की आवश्यकता सामान्य से कहीं अधिक होती है। गर्मी में यह आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। यदि पर्याप्त मात्रा में जल न पिया जाए तो गर्भ में उपस्थित तरल पदार्थ की मात्रा कम हो सकती है, जो शिशु के विकास के लिए अत्यंत हानिकारक है।

पाचन तंत्र पर असर: गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ा होता है जो पाचन तंत्र को धीमा कर देता है। इससे अम्लता, पेट फूलना और कब्ज की समस्या और भी बढ़ जाती है। गर्मी में गलत खान-पान इन समस्याओं को और गंभीर बना सकता है।

थकान और दुर्बलता: गर्मी में शरीर को स्वयं को नियंत्रित रखने में अधिक ऊर्जा लगती है। गर्भावस्था में भी ऊर्जा की खपत अधिक होती है। इन दोनों कारणों से गर्भवती महिला बहुत जल्दी थक जाती है, चक्कर आ सकते हैं और रक्तचाप भी कम हो सकता है।

शिशु पर प्रभाव: यदि माँ के शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाए तो यह शिशु के मस्तिष्क और मेरुदंड के विकास को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर पहली तिमाही में। इसीलिए गर्भावस्था में गर्मी का खान-पान केवल आराम के लिए नहीं बल्कि शिशु की सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।

गर्मियों में प्रेग्नेंसी डाइट प्लान: पूरे दिन का आहार तालिका

नीचे दी गई आहार तालिका विशेष रूप से गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं के लिए तैयार की गई है। यह एक संतुलित योजना है जो जलयोजन, पोषण और पाचन तीनों का ध्यान रखती है।

समयक्या खाएंक्यों जरूरी है
प्रातः 6:30 बजे (उठते ही)एक गिलास ठंडा नारियल जल अथवा सादा जलरात भर की निर्जलता दूर करता है, खनिज लवणों की पूर्ति करता है
प्रातः 8:00 बजे (नाश्ता)दलिया अथवा पोहा सब्जियों के साथ और एक गिलास दूधजटिल कार्बोहाइड्रेट, रेशा, कैल्शियम और लौह तत्व की पूर्ति
प्रातः 10:30 बजे (मध्याह्न पूर्व)तरबूज, खीरा, खरबूजा अथवा एक अनारजलयोजन, विटामिन, प्राकृतिक शर्करा से ऊर्जा
दोपहर 1:00 बजे (भोजन)दो रोटी, दाल, हरी सब्जी जैसे लौकी या तोरई और एक कटोरी दहीप्रोटीन, लौह, रेशा और आँत स्वास्थ्य के लिए
दोपहर 3:30 बजे (अपराह्न जलपान)नारियल जल, आम पना अथवा शिकंजी और मुट्ठी भर भीगे बादामजलयोजन, स्वस्थ वसा, विटामिन ई
सायं 5:30 बजे (सायंकालीन जलपान)अंकुरित मूँग की चाट अथवा फल चाट बिना मसाले केलौह, प्रोटीन, रेशा और विटामिन
रात्रि 8:00 बजे (रात्रि भोजन)खिचड़ी अथवा दाल-रोटी, सलाद और एक कटोरी दहीहल्का, सुपाच्य और सम्पूर्ण पोषण
सोने से पूर्व रात्रि 10:00 बजेएक गिलास ठंडा दूध अथवा हल्दी दूधकैल्शियम, अच्छी नींद और शिशु की हड्डियों का विकास

आहार तालिका का विस्तृत विवरण

प्रातःकाल की शुरुआत नारियल जल से करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि रात भर आप कुछ नहीं पीती हैं और शरीर में हल्की निर्जलता आ जाती है। यह प्रथम कदम उस कमी को पूरा करता है और शरीर को दिन भर के लिए तैयार करता है।

नाश्ते में दलिया या पोहा इसलिए सर्वोत्तम हैं क्योंकि ये हल्के होते हुए भी पोषण से भरपूर हैं। गर्मी में भारी नाश्ता जैसे परांठे या पूरी खाने से शरीर को पाचन में अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है जिससे और अधिक थकान होती है।

मध्याह्न पूर्व के जलपान में फल खाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि नाश्ते और भोजन के बीच रक्त शर्करा गिर सकती है। तरबूज और खीरा जैसे फलों में जल की मात्रा अधिक होती है और साथ ही विटामिन भी प्रचुर मात्रा में होते हैं।

दोपहर का भोजन सदैव संतुलित होना चाहिए जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सब्जियाँ सम्मिलित हों। दोपहर में दही अवश्य खाएं क्योंकि यह आँत के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

रात्रि भोजन सदैव हल्का रखें। रात्रि में पाचन तंत्र और धीमा हो जाता है। खिचड़ी और दाल-रोटी रात के लिए आदर्श आहार हैं।

प्रेग्नेंसी में गर्मी में क्या खाएं: विस्तृत जानकारी

फल: प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार

गर्मी में गर्भावस्था में गर्मी का खान-पान बेहतर बनाने के लिए मौसमी फल सबसे बड़े सहायक हैं। प्रत्येक फल के अपने विशेष गुण हैं जो गर्भावस्था में अलग-अलग रूप से लाभकारी हैं।

तरबूज गर्मी में गर्भावस्था के लिए सर्वाधिक उपयोगी फल है। इसमें लगभग नब्बे प्रतिशत जल होता है जो शरीर को जलयुक्त रखता है। इसमें लाइकोपीन नामक तत्व होता है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और शिशु के विकास में सहायक है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन ए, बी6 और सी भी होते हैं। प्रतिदिन दो से तीन कटोरी तरबूज खाया जा सकता है।

अनार गर्भावस्था में रक्त की कमी एक बड़ी समस्या है, विशेषकर गर्मी में जब भूख कम होती है। अनार लौह तत्व का एक उत्कृष्ट स्रोत है। इसके अतिरिक्त इसमें फोलेट होता है जो शिशु के मस्तिष्क और मेरुदंड के विकास के लिए अनिवार्य है। प्रतिदिन आधा से एक अनार अथवा एक गिलास अनार का रस पीना अत्यंत लाभकारी है।

केला तत्काल ऊर्जा का सर्वोत्तम स्रोत है। इसमें पोटेशियम होता है जो माँसपेशियों की ऐंठन को कम करता है जो गर्भावस्था में एक बहुत सामान्य समस्या है। गर्मी में पसीने के साथ पोटेशियम भी निकल जाता है, ऐसे में प्रतिदिन एक केला खाना अत्यंत आवश्यक है।

खीरा और खरबूजा दोनों में जल की मात्रा अधिक होती है और ये शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। खीरे में सिलिका होता है जो त्वचा को स्वस्थ रखता है। इन्हें दिन में जलपान के रूप में कभी भी खाया जा सकता है।

सब्जियाँ: पोषण का भंडार

गर्मी में हरी और जल युक्त सब्जियाँ सर्वाधिक उपयुक्त हैं। लौकी, तोरई, टिंडा और पालक इस मौसम में शरीर के लिए सबसे अनुकूल हैं।

लौकी और तोरई में जल की मात्रा अधिक होती है, कैलोरी कम होती है और ये पचने में बहुत सुगम होती हैं। गर्मी में जब भारी भोजन करने का मन नहीं होता, तब इन सब्जियों से बनी हल्की सब्जी आदर्श रहती है।

पालक लौह तत्व और फोलिक अम्ल का बहुमूल्य स्रोत है। गर्भावस्था में फोलिक अम्ल शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए अनिवार्य है। पालक को कम तेल में बनाएं ताकि इसके पोषक तत्व नष्ट न हों।

प्रोटीन स्रोत: शिशु की वृद्धि के लिए अनिवार्य

गर्मी में अधिक मांस-मछली खाने से शरीर में अधिक उष्णता उत्पन्न होती है। इसलिए वनस्पति आधारित प्रोटीन को प्राथमिकता दें।

दालें और अंकुरित दालें गर्भावस्था में प्रोटीन का सर्वोत्तम शाकाहारी स्रोत हैं। अंकुरित मूँग, चने और मोठ में प्रोटीन के साथ-साथ लौह और जस्ता भी होते हैं। इन्हें सलाद या चाट के रूप में खाना गर्मी में सबसे उचित तरीका है।

दही और छाछ गर्मी में गर्भावस्था के लिए दोहरा लाभ देते हैं। एक ओर ये कैल्शियम और प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, दूसरी ओर इनमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो आँत के स्वास्थ्य को बेहतर रखते हैं। प्रतिदिन कम से कम एक कटोरी दही अवश्य खाएं।

भीगे हुए बादाम और अखरोट स्वस्थ वसा और ओमेगा-3 वसा अम्ल के लिए अत्युत्तम हैं। बादाम को रात में भिगोकर सुबह खाने से उनका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है।

गर्मी में प्रेग्नेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए

तला-भुना भोजन क्यों वर्जित है?

समोसे, पकोड़े, पूरी और गहरे तेल में तले हुए खाद्य पदार्थ गर्मी में गर्भावस्था के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। इन्हें पचाने में शरीर को बहुत अधिक ऊर्जा और ताप उत्पन्न करना पड़ता है जिससे शरीर का तापमान बढ़ता है। इनमें संतृप्त वसा होती है जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है और गर्भकालीन मधुमेह का जोखिम बढ़ाती है। इनसे अम्लता और छाती में जलन की समस्या और भी गंभीर हो जाती है।

अत्यधिक मसालेदार भोजन

गर्मी में अधिक मसालेदार भोजन खाने से पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे तीव्र अम्लता, छाती में जलन और बार-बार उल्टी हो सकती है। कुछ तीखे मसाले शरीर में उष्णता उत्पन्न करते हैं जो गर्भाशय के लिए उचित नहीं है। भोजन में हींग, जीरा और अजवाइन का उपयोग करें जो पाचन में सहायक होते हैं।

बाहर का खाना और कटे हुए फल

गर्मी में जीवाणु बहुत तेजी से पनपते हैं। बाहर की दुकानों पर रखे कटे हुए फल, रस और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है। गर्भावस्था में प्रतिरोधक क्षमता स्वाभाविक रूप से कुछ कम हो जाती है, इसलिए खाद्य विषाक्तता का प्रभाव बहुत गंभीर हो सकता है और यह गर्भपात या समय से पूर्व प्रसव तक का कारण बन सकता है।

कैफीन युक्त पेय पदार्थ

चाय और कॉफी में कैफीन होता है जो एक मूत्रवर्धक की तरह कार्य करता है अर्थात शरीर से जल और खनिज निकालता है। गर्मी में जब पहले से ही निर्जलीकरण का खतरा है, ऐसे में अधिक कैफीन लेना और हानिकारक है। दिन में एक छोटे कप से अधिक चाय या कॉफी न लें। शीतल पेय और ऊर्जा प्रदान करने वाले पेय पदार्थों में भी कैफीन और अत्यधिक शर्करा होती है जो पूर्णतः वर्जित है।

डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ

डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में सोडियम बहुत अधिक होता है। अधिक सोडियम से शरीर में जल प्रतिधारण होती है जिससे पैरों और हाथों में सूजन बढ़ जाती है। इनमें परिरक्षक और कृत्रिम रंग भी होते हैं जो शिशु के विकास के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

हाइड्रेशन गाइड: प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से कैसे बचें

प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से कैसे बचें यह प्रश्न गर्मियों में हर गर्भवती महिला के मन में होता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

प्रतिदिन कितना जल पिएं?

गर्भावस्था में सामान्यतः प्रतिदिन आठ से दस गिलास अर्थात लगभग दो से ढाई लीटर जल पीने की सलाह दी जाती है। परंतु गर्मी में यह मात्रा बढ़कर दस से बारह गिलास तक होनी चाहिए। एक साथ बहुत अधिक जल न पिएं, बल्कि हर एक से डेढ़ घंटे में एक गिलास जल पीती रहें। यह शरीर में जल का संतुलन बनाए रखता है और वृक्कों पर अनावश्यक दबाव भी नहीं डालता।

नारियल जल: प्रकृति का सर्वोत्तम पेय पदार्थ

प्रेग्नेंसी में कौन से जूस पिएं इस प्रश्न का सबसे पहला उत्तर है नारियल जल। इसमें सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे खनिज लवण होते हैं जो पसीने के साथ निकल जाते हैं। यह प्राकृतिक रूप से मधुर होता है इसलिए अतिरिक्त चीनी की आवश्यकता नहीं होती। प्रतिदिन प्रातःकाल एक गिलास ताजा नारियल जल पीना गर्मी में गर्भावस्था के लिए सर्वोत्तम आदत है।

छाछ और दही: दोहरा लाभ

छाछ अर्थात मट्ठा गर्मी में गर्भावस्था का सर्वोत्तम साथी है। यह शरीर को ठंडक देती है, जलयोजन बनाए रखती है और साथ ही कैल्शियम और प्रोटीन भी प्रदान करती है। इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं। दोपहर के भोजन के साथ एक गिलास छाछ अवश्य लें। नमक के स्थान पर थोड़ा भुना जीरा और पुदीना डालें जो इसे और पोषणयुक्त बनाता है।

ताजे फलों के रस: प्रेग्नेंसी में कौन से जूस पिएं?

अनार का रस, तरबूज का रस, संतरे का रस और आम पना सर्वाधिक लाभकारी हैं। परंतु ध्यान रखें कि रस सदैव घर पर ताजा बनाएं और उसमें अतिरिक्त चीनी न डालें। डिब्बाबंद रसों में परिरक्षक और अतिरिक्त शर्करा होती है जो वर्जित है।

निर्जलीकरण के लक्षण पहचानें

यदि आपके मूत्र का रंग गहरा पीला है, मुँह सूखता है, अत्यधिक थकान और चक्कर आते हैं, सिरदर्द होता है अथवा बहुत कम मूत्र आ रहा है तो ये निर्जलीकरण के संकेत हैं। इन लक्षणों को अनदेखा न करें और तत्काल जल अथवा नारियल जल पिएं। यदि उल्टी के कारण कुछ भी अंदर न रह रहा हो तो चिकित्सक की सलाह से जलीय घोल का उपयोग करें।

तिमाही के अनुसार गर्मी में आहार

पहली तिमाही में गर्भावस्था का खान-पान (एक से तीन माह)

पहली तिमाही में मतली और उल्टी सर्वाधिक होती है। गर्मी इसे और अधिक बढ़ा देती है। इस दौरान भोजन बहुत छोटी-छोटी मात्रा में और बार-बार करना चाहिए। प्रत्येक दो से तीन घंटे में कुछ न कुछ अवश्य खाएं।

ठंडे और हल्के खाद्य पदार्थ जैसे खीरा, दही, नारियल जल और सादा दलिया सर्वाधिक उपयुक्त हैं। फोलिक अम्ल के लिए पालक, अंकुरित दालें और अनार अवश्य सम्मिलित करें। अदरक की हल्की चाय मतली में राहत देती है परंतु इसकी मात्रा सीमित रखें।

दूसरी तिमाही में गर्भावस्था का खान-पान (चार से छह माह)

यह तिमाही अपेक्षाकृत सहज होती है। इस दौरान शिशु की वृद्धि तीव्र गति से होती है इसलिए प्रोटीन और कैल्शियम की आवश्यकता बढ़ जाती है। दूध, दही, पनीर, दालें और अंकुरित चने इस समय के सर्वोत्तम खाद्य पदार्थ हैं।

लौह तत्व की कमी इस तिमाही में सर्वाधिक होती है। अनार, पालक, चुकंदर और कुलथी की दाल लौह के लिए उत्तम हैं। विटामिन सी के साथ लौह लेने से उसका अवशोषण बढ़ता है, इसलिए लौह युक्त खाद्य पदार्थों के साथ नींबू या संतरे का रस अवश्य लें।

तीसरी तिमाही में गर्भावस्था का खान-पान (सात से नौ माह)

इस समय शिशु का आकार बड़ा होने से आमाशय पर दबाव बढ़ता है जिससे एक बार में अधिक खाना कठिन हो जाता है। इसलिए पाँच से छह छोटे भोजन लें। कब्ज इस तिमाही में बहुत सामान्य है, इसलिए रेशा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल और सब्जियाँ अवश्य लें।

शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए ओमेगा-3 वसा अम्ल अनिवार्य हैं। अखरोट, अलसी के बीज और सरसों का तेल इसके उत्तम शाकाहारी स्रोत हैं। कैल्शियम इस तिमाही में सर्वाधिक आवश्यक है क्योंकि शिशु की हड्डियाँ और दाँत बन रहे होते हैं।

विशेषज्ञ सलाह: डॉ. ऋतु अग्रवाल, रितु आईवीएफ जयपुर

डॉ. ऋतु अग्रवाल जो कि रितु आईवीएफ, विवेक विहार, जयपुर में वरिष्ठ प्रजनन विशेषज्ञ हैं, गर्मी में गर्भावस्था के लिए यह व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सलाह देती हैं:

  • घर का ताजा बना भोजन सदैव प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए। गर्मी में भोजन शीघ्र खराब होता है इसलिए ताजा पका भोजन ही खाएं और बासी भोजन से बिल्कुल बचें।
  • प्रातः ग्यारह बजे से सायं चार बजे के बीच बाहर जाने से यथासंभव बचें। इस समय सूर्य की किरणें और तापमान सर्वाधिक होते हैं।
  • प्रत्येक भोजन से पूर्व और पश्चात हाथ भलीभाँति धोएं। गर्मी में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
  • विटामिन डी के लिए प्रातः सात से नौ बजे के बीच पंद्रह से बीस मिनट हल्की धूप लें।
  • कोई भी पोषक पूरक चिकित्सक की सलाह के बिना न लें।
  • यदि अत्यधिक उल्टी हो रही हो और जल भी अंदर न रह रहा हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
  • नियमित प्रसव पूर्व जाँच न छोड़ें। गर्मी में उल्बीय द्रव के स्तर और शिशु की वृद्धि की निगरानी अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष

गर्मियों में गर्भावस्था डाइट प्लान यदि सुविचारित और संतुलित हो तो यह ऋतु भी आपके और आपके शिशु के लिए स्वास्थ्यप्रद और सुरक्षित बन सकती है। उचित खान-पान, पर्याप्त जलयोजन, मौसमी फल और सब्जियाँ, हल्का घर का बना भोजन और नियमित चिकित्सकीय जाँच, ये पाँच आधार आपकी गर्मी की गर्भावस्था को बहुत सुगम बना सकते हैं।

स्मरण रखें कि प्रत्येक महिला की गर्भावस्था भिन्न होती है। कोई भी बड़ा आहार परिवर्तन करने से पूर्व अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें। किसी भी असामान्य लक्षण को अनदेखा न करें।

रितु आईवीएफ, विवेक विहार, जयपुर में डॉ. ऋतु अग्रवाल और उनकी अनुभवी टीम आपकी प्रजनन और गर्भावस्था यात्रा में व्यक्तिगत मार्गदर्शन और विशेषज्ञ देखभाल के साथ हर कदम पर आपके साथ है।

आज ही परामर्श बुक करें और अपनी गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ बनाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या गर्मी में गर्भावस्था के दौरान प्रतिदिन नारियल जल पी सकते हैं?

हाँ, गर्मी में गर्भावस्था के दौरान प्रतिदिन नारियल जल पीना न केवल सुरक्षित है बल्कि अत्यंत लाभकारी भी है। इसमें प्राकृतिक खनिज लवण होते हैं जो गर्मी में पसीने के साथ निकल जाते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक है और मूत्र मार्ग के संक्रमण से भी सुरक्षा प्रदान करता है। एक गिलास अर्थात लगभग दो सौ से ढाई सौ मिलीलीटर नारियल जल प्रतिदिन पीना उचित है। यदि आपको गर्भकालीन मधुमेह है तो अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।

2. गर्भावस्था में आम खाना उचित है अथवा नहीं?

पका हुआ ताजा आम सीमित मात्रा में गर्भावस्था में खाया जा सकता है और यह लाभकारी भी है। आम में विटामिन सी, ए और लौह तत्व होते हैं जो गर्भावस्था में अनिवार्य हैं। परंतु इसमें प्राकृतिक शर्करा भी अधिक होती है। इसलिए गर्भकालीन मधुमेह की जोखिम वाली महिलाएं अथवा जिन्हें पहले से यह समस्या है, वे आम बहुत कम मात्रा में और चिकित्सक की सलाह से ही खाएं। कच्चे आम से बना आम पना जो कम चीनी में बनाया गया हो, गर्मी में उत्कृष्ट शीतल पेय है।

3. गर्भावस्था में निर्जलीकरण के क्या लक्षण हैं और क्या करें?

निर्जलीकरण के मुख्य लक्षण हैं: गहरे पीले रंग का मूत्र, मुँह और होठों का सूखना, अत्यधिक थकान और दुर्बलता, सिरदर्द, चक्कर आना और बहुत कम मूत्र आना। यदि ये लक्षण दिखें तो तत्काल जल, नारियल जल अथवा जलीय घोल पिएं और ठंडे स्थान पर जाएं। यदि लक्षण गंभीर हों जैसे बेहोशी, अत्यंत तीव्र हृदय गति अथवा बिल्कुल मूत्र न आना तो बिना विलंब किए चिकित्सालय जाएं।

4. गर्मी में गर्भावस्था में कौन से रस पीना सर्वोत्तम है?

गर्मी में गर्भावस्था के लिए सर्वोत्तम रस हैं: अनार का रस जो लौह के लिए सर्वश्रेष्ठ है, तरबूज का रस जो जलयोजन के लिए उत्कृष्ट है, संतरे का रस जो विटामिन सी और फोलेट का अच्छा स्रोत है और आम पना जो शीतल प्रभाव देता है। सभी रस घर पर ताजा बनाएं और बिना चीनी के पिएं। डिब्बाबंद रसों में परिरक्षक होते हैं इसलिए उनसे बचें।

5. क्या गर्मी में तरबूज प्रतिदिन खाया जा सकता है?

हाँ, तरबूज गर्मी में गर्भावस्था के लिए सर्वाधिक उपयुक्त फलों में से एक है। इसमें नब्बे प्रतिशत जल, लाइकोपीन, विटामिन सी और पोटेशियम होता है। यह शरीर को जलयुक्त रखता है, सूजन कम करता है और माँसपेशियों की ऐंठन में राहत देता है। प्रतिदिन दो से तीन कटोरी अर्थात लगभग दो सौ से तीन सौ ग्राम तरबूज खाना पूर्णतः सुरक्षित और लाभकारी है।

6. गर्मी में गर्भावस्था में बाहर का भोजन कितना सुरक्षित है?

गर्मी में गर्भावस्था के दौरान बाहर का भोजन, विशेषकर खुले में रखे कटे फल, रस और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ खाना बिल्कुल वर्जित है। गर्मी में जीवाणु बहुत तेजी से पनपते हैं और खाद्य संदूषण का खतरा बहुत अधिक होता है। खाद्य विषाक्तता गर्भावस्था में अत्यंत गंभीर हो सकती है और इससे निर्जलीकरण, समय पूर्व प्रसव और शिशु को संक्रमण का खतरा हो सकता है।

7. पहली तिमाही में अत्यधिक उल्टी हो तो गर्मी में क्या करें?

पहली तिमाही में मतली और गर्मी का संयोजन बहुत कठिन हो सकता है। प्रातः उठते ही बिस्तर पर ही सूखे नमकीन बिस्कुट अथवा सादी रोटी खाएं, इससे मतली कम होती है। ठंडे और हल्के खाद्य पदार्थ जैसे खीरा, ठंडा दही और नारियल जल आमाशय के लिए सुखदायक होते हैं। एक बार में अधिक न खाएं, प्रत्येक डेढ़ से दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाती रहें। अदरक का छोटा टुकड़ा चूसने से मतली में राहत मिलती है। यदि उल्टी अत्यधिक हो और जल भी अंदर न रह रहा हो तो यह चिकित्सीय आपातकाल है, तुरंत चिकित्सक से मिलें।