बारिश का मौसम शुरू होते ही बहुत सी महिलाएं यह महसूस करती हैं कि उनकी माहवारी और अधिक अनियमित हो गई, वज़न और बढ़ गया, मुँहासे फिर निकल आए और थकान पहले से ज़्यादा रहने लगी।
यदि आपको PCOS यानी बहुगंडिका अंडाशय सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) है, तो यह कोई संयोग नहीं है।
मानसून का मौसम PCOS से पीड़ित महिलाओं के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण मौसमों में से एक होता है। 2026 में भारत में प्रजनन आयु की हर 5 में से 1 महिला PCOS से प्रभावित है और इनमें से 70% महिलाओं को अभी तक सही निदान नहीं मिला है।
Ritu IVF, Jaipur में Dr. Ritu Agarwal कहती हैं कि मानसून में उनके पास PCOS से जुड़ी शिकायतें लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है। यह मौसम कई कारणों से PCOS के लक्षणों को और गंभीर बना देता है।
इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि मानसून में PCOS की समस्या क्यों बढ़ती है, इसके पीछे क्या कारण हैं और इस मौसम में PCOS को नियंत्रित रखने के लिए क्या करना चाहिए।
PCOS क्या होता है और यह क्यों होता है?
PCOS एक हार्मोनल विकार है जो महिला के अंडाशय को प्रभावित करता है। इसमें अंडाशय में छोटी-छोटी थैलियाँ (Cysts) बन जाती हैं जो अंडों को परिपक्व होने से रोकती हैं।
PCOS के मुख्य लक्षणों में अनियमित माहवारी, अत्यधिक बाल उगना, मुँहासे, वज़न बढ़ना, बालों का झड़ना और गर्भधारण में कठिनाई शामिल हैं। इसके मूल में इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) और हार्मोनल असंतुलन होता है।
PCOS में AMH का स्तर भी अधिक होता है। यदि आप AMH Test के बारे में विस्तार से जानना चाहती हैं तो AMH Test क्या होता है और क्यों ज़रूरी है यह ब्लॉग पढ़ें।
मानसून में PCOS की समस्या क्यों बढ़ जाती है?
पहला कारण: विटामिन D की कमी
मानसून में आकाश में बादल छाए रहते हैं और धूप बहुत कम मिलती है। इससे शरीर में विटामिन D का निर्माण कम हो जाता है।
यह PCOS के लिए विशेष रूप से हानिकारक है। 195 PCOS रोगियों पर किए गए एक नैदानिक अध्ययन में पाया गया कि 84.1% PCOS रोगियों में विटामिन D की कमी थी। 2025 में Frontiers in Nutrition में प्रकाशित एक शोध के अनुसार विटामिन D की कमी सीधे इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाती है और हार्मोनल असंतुलन को और गंभीर बना देती है।
मानसून में पहले से कम विटामिन D और कम होने से PCOS के लक्षण तेज़ी से बिगड़ते हैं।
दूसरा कारण: शारीरिक गतिविधि में कमी
बारिश के कारण अधिकांश महिलाएं घर से बाहर निकलना बंद कर देती हैं। सैर, व्यायाम और योग सब कम हो जाते हैं।
शारीरिक गतिविधि PCOS में इंसुलिन प्रतिरोध को कम करने का सबसे प्रभावशाली तरीका है। जब व्यायाम बंद होता है तो इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ता है, पुरुष हार्मोन (Androgens) का स्तर बढ़ता है और माहवारी और अधिक अनियमित हो जाती है।
तीसरा कारण: बाहरी और तला-भुना खाना अधिक खाना
मानसून में पकौड़े, समोसे और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थों की इच्छा बढ़ जाती है। यह स्वाभाविक है लेकिन PCOS के लिए बेहद नुकसानदेह है।
2023 में प्रकाशित एक शोध में PCOS और बाहरी जंक भोजन के सेवन के बीच स्पष्ट सम्बन्ध पाया गया। परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट, अधिक वसा और शर्करा युक्त खाना इंसुलिन का स्तर तेज़ी से बढ़ाता है जो PCOS को और गंभीर बना देता है।
चौथा कारण: मानसिक तनाव और नकारात्मक मनोदशा
मानसून में बादल और अंधेरे वातावरण के कारण सेरोटोनिन यानी प्रसन्नता हार्मोन का उत्पादन कम होता है। इससे मनोदशा उदास रहती है, चिंता बढ़ती है और तनाव का स्तर बढ़ जाता है।
तनाव के कारण शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन का स्तर बढ़ता है। 2026 में प्रकाशित एक विशेषज्ञ विश्लेषण के अनुसार दीर्घकालिक तनाव से कॉर्टिसोल बढ़ता है जो सीधे इंसुलिन प्रतिरोध को बिगाड़ता है और हार्मोनल असंतुलन को गहरा करता है। PCOS में यह चक्र और भी तेज़ हो जाता है।
पाँचवाँ कारण: नींद में बाधा
मानसून में बारिश की आवाज़ें, उमस और अनियमित दिनचर्या नींद को प्रभावित करती हैं। PCOS में पहले से नींद की समस्या होती है और मानसून इसे और बिगाड़ देता है।
खराब नींद से इंसुलिन, कॉर्टिसोल और प्रजनन हार्मोन सभी प्रभावित होते हैं। यह PCOS के लक्षणों को और तेज़ करता है।
छठा कारण: संक्रमण का बढ़ा हुआ खतरा
मानसून में जल-जनित और मच्छर-जनित संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। PCOS से पीड़ित महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से कमज़ोर होती है जिससे वे संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
मानसून में संक्रमण से बचाव के विस्तृत उपायों के लिए मानसून में Pregnancy में Infection से बचाव पढ़ें।
मानसून में PCOS के बढ़े हुए लक्षण कौन से हैं?
मानसून में PCOS से पीड़ित महिलाओं में निम्नलिखित लक्षण अधिक स्पष्ट होते हैं।
माहवारी और अधिक अनियमित हो जाती है या कई महीनों तक रुक जाती है। चेहरे और पीठ पर मुँहासे बढ़ जाते हैं। वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है विशेष रूप से पेट के आसपास। बालों का झड़ना बढ़ जाता है। अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होती है। मनोदशा में उतार-चढ़ाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। पेट फूलने की समस्या अधिक होती है।
मानसून में PCOS को नियंत्रित रखने के उपाय
आहार में सुधार करें
परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा, चीनी, बिस्कुट और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचें। इनसे इंसुलिन का स्तर तेज़ी से बढ़ता है।
घर का ताज़ा पका हुआ भोजन खाएं। दलिया, मूंग दाल, हरी सब्ज़ियाँ, दही और मौसमी फल जैसे जामुन और अमरूद PCOS में लाभकारी हैं। भोजन हर 3 से 4 घंटे में छोटी-छोटी मात्रा में लें।
मानसून में गर्भवती महिलाओं के लिए उचित आहार जानने के लिए गर्भवती महिलाओं के लिए मानसून का आहार पढ़ें।
विटामिन D की कमी पूरी करें
मानसून में धूप कम मिलती है इसलिए विटामिन D की कमी होने की संभावना अधिक रहती है। अपने चिकित्सक से विटामिन D का परीक्षण करवाएं और यदि कमी हो तो उनकी सलाह पर उचित पूरक लें।
विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दूध, दही, अंडे और मशरूम को अपने आहार में शामिल करें।
घर पर व्यायाम जारी रखें
बारिश में बाहर न जा सकें तो घर पर ही योग, सीढ़ियाँ चढ़ना, हल्का नृत्य या इनडोर व्यायाम करें। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि PCOS में इंसुलिन प्रतिरोध को कम रखती है।
भोजन के बाद 10 से 15 मिनट हल्की सैर करना इंसुलिन को नियंत्रित रखने का सबसे सरल उपाय है।
तनाव को कम करें
योग और ध्यान को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद लें, प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद हार्मोनल संतुलन के लिए आवश्यक है।
मोबाइल और स्क्रीन का उपयोग सोने से पहले कम करें। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं क्योंकि सामाजिक संपर्क तनाव कम करता है।
नियमित चिकित्सीय जाँच करवाएं
मानसून में PCOS के लक्षण बढ़ें तो चिकित्सक से मिलने में देरी न करें। माहवारी यदि 2 महीने से अधिक रुकी हो तो यह PCOS का गंभीर संकेत है। माहवारी की अनियमितता के बारे में अधिक जानकारी के लिए पीरियड जल्दी लाने के घरेलू उपाय पढ़ें।
पानी भरपूर पीएं
प्रतिदिन कम से कम 8 से 10 गिलास स्वच्छ पानी पीएं। पर्याप्त जलयोजन इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारने में सहायक होता है और शरीर से अनावश्यक हार्मोन बाहर निकालने में मदद करता है।
PCOS और प्रजनन क्षमता: मानसून में विशेष सावधानी
PCOS भारत में महिला बांझपन का सबसे सामान्य कारण है। मानसून में PCOS के लक्षण बिगड़ने से उन महिलाओं के लिए जो गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं, उनकी चुनौती और बढ़ जाती है।
यदि आप PCOS के साथ गर्भधारण की योजना बना रही हैं तो मानसून में नियमित चिकित्सीय निगरानी अत्यंत आवश्यक है। IVF उपचार में PCOS के मामलों में विशेष प्रोटोकॉल अपनाया जाता है। कुछ जटिल मामलों में IVF के साथ PRP Therapy भी सहायक हो सकती है, इसके बारे में जानने के लिए IVF में PRP थेरेपी के फायदे पढ़ें।
Dr. Ritu Agarwal की सलाह
Ritu IVF, Jaipur में Dr. Ritu Agarwal PCOS से पीड़ित महिलाओं को मानसून में विशेष रूप से यह बातें बताती हैं।
पहली बात: PCOS एक दीर्घकालिक स्थिति है जिसे मौसम के अनुसार प्रबंधन की ज़रूरत होती है। मानसून में जीवनशैली में थोड़ी सी लापरवाही भी लक्षणों को तेज़ कर सकती है।
दूसरी बात: विटामिन D की जाँच अवश्य करवाएं। अधिकांश PCOS रोगियों में यह कम होती है और मानसून में यह समस्या और बढ़ जाती है। सही स्तर बनाए रखने से इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार होता है।
तीसरी बात: माहवारी की अनियमितता को सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ न करें। दो महीने से अधिक माहवारी न आए तो तुरंत परामर्श लें।
चौथी बात: PCOS में IVF की सफलता दर अच्छी होती है यदि उचित समय पर सही उपचार शुरू हो। देरी न करें।
मानसून में PCOS प्रबंधन: सरल सारांश
| क्या करें | क्यों ज़रूरी है |
|---|---|
| घर का ताज़ा भोजन खाएं | इंसुलिन प्रतिरोध कम होता है |
| विटामिन D जाँच करवाएं | कमी से PCOS बिगड़ता है |
| नियमित व्यायाम करें | हार्मोनल संतुलन बनता है |
| तनाव कम करें | कॉर्टिसोल नियंत्रित रहता है |
| पर्याप्त नींद लें | हार्मोनल संतुलन बनता है |
| नियमित जाँच करवाएं | समय पर निदान होता है |
| क्या न करें | क्यों नुकसानदेह है |
|---|---|
| बाहर का तला-भुना न खाएं | इंसुलिन तेज़ी से बढ़ता है |
| व्यायाम न छोड़ें | प्रतिरोध बढ़ता है |
| लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें | स्थिति गंभीर होती है |
| स्वयं औषधि न लें | हार्मोनल नुकसान होता है |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मानसून में PCOS के लक्षण क्यों बढ़ जाते हैं?
मानसून में धूप कम होने से विटामिन D घटता है, शारीरिक गतिविधि कम होती है, तनाव बढ़ता है और बाहर का तला-भुना खाना अधिक खाया जाता है। यह सभी कारण मिलकर इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाते हैं और हार्मोनल असंतुलन को गंभीर बनाते हैं जिससे PCOS के लक्षण बिगड़ते हैं।
क्या मानसून में PCOS से माहवारी पूरी तरह रुक सकती है?
हाँ। यदि PCOS पहले से है और मानसून में जीवनशैली बिगड़े तो माहवारी कई महीनों तक रुक सकती है। यह स्थिति इंसुलिन प्रतिरोध और हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है। 2 महीने से अधिक माहवारी न आए तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।
मानसून में PCOS वाली महिला को क्या खाना चाहिए?
मानसून में PCOS में घर का ताज़ा पका भोजन, मूंग दाल, हरी सब्ज़ियाँ, दही, जामुन, अमरूद और पर्याप्त प्रोटीन लेना चाहिए। परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट, चीनी, मैदा और बाहर के तले-भुने खाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
क्या मानसून में PCOS का उपचार जारी रखना चाहिए?
हाँ। PCOS की औषधियाँ और उपचार मौसम के अनुसार बंद नहीं करना चाहिए। मानसून में तो और अधिक नियमितता की ज़रूरत होती है। चिकित्सक से नियमित परामर्श जारी रखें।
PCOS में मानसून के दौरान गर्भधारण की संभावना कैसी होती है?
मानसून में PCOS के लक्षण बढ़ने से अंडाशय से अंडे का निकलना यानी ओव्यूलेशन और अधिक अनियमित हो सकता है जिससे गर्भधारण की संभावना कम होती है। इस मौसम में जीवनशैली सुधार और नियमित चिकित्सीय निगरानी गर्भधारण की संभावना बनाए रखने में सहायक होती है।
मानसून में PCOS की जाँच कौन सी करवाएं?
मानसून में PCOS की स्थिति समझने के लिए AMH, FSH, LH, इंसुलिन स्तर, विटामिन D और अल्ट्रासाउंड करवाना उपयोगी रहता है। इनसे PCOS की गंभीरता और उपचार की दिशा स्पष्ट होती है।
क्या मानसून में PCOS के कारण वज़न तेज़ी से बढ़ता है?
हाँ। मानसून में व्यायाम कम होना, तला-भुना खाना अधिक खाना और इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ना मिलकर PCOS में वज़न तेज़ी से बढ़ाते हैं विशेष रूप से पेट के आसपास। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इसे नियंत्रित रख सकता है।
निष्कर्ष
मानसून एक ऐसा मौसम है जो PCOS से पीड़ित महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधानी की माँग करता है। विटामिन D की कमी, कम व्यायाम, गलत आहार और बढ़ा हुआ तनाव मिलकर इस मौसम में PCOS को और गंभीर बना देते हैं।
लेकिन सही जानकारी और थोड़ी सी सतर्कता से इस मौसम में भी PCOS को नियंत्रित रखा जा सकता है। घर का ताज़ा भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय पर चिकित्सीय परामर्श आपके सबसे बड़े हथियार हैं।
Ritu IVF, Jaipur में Dr. Ritu Agarwal और उनकी विशेषज्ञ टीम PCOS से जुड़ी हर समस्या में आपके साथ है।
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यह ब्लॉग केवल सामान्य जानकारी के लिए है। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति के लिए Dr. Ritu Agarwal से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।


